रसोई में आई खुशहाली, GST नियमों में बदलाव के बाद सस्ते हुए खाने के तेल, जानें 1 लीटर की नई कीमतें

Cooking Oil Price Drop: लगातार बढ़ती महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। अगर आप भी रसोई के बढ़ते बजट से परेशान थे, तो अब आपके लिए मुस्कुराने का वक्त है। नए जीएसटी (GST) नियमों और बाजार में सप्लाई सुधरने की वजह से खाने के तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट आई है। Cooking Oil Price Drop का सीधा असर अब आपकी जेब और घर के बजट पर दिखने लगा है।

पिछले कुछ महीनों से तेल के भाव आसमान छू रहे थे, जिससे आम परिवारों का मंथली बजट बिगड़ गया था। लेकिन अब सरकार के कुछ फैसलों और बेहतर स्टॉक की वजह से तेल की कीमतों में नरमी आई है।

GST नियमों का असर: क्यों कम हुए दाम?

सरकार ने खाद्य तेलों पर लगने वाले जीएसटी ढांचे में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। टैक्स का बोझ कम होने से कंपनियों की उत्पादन लागत (Production Cost) घट गई है। जब कंपनियों को कच्चा माल तैयार करने में कम पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, तो उन्होंने इसका सीधा फायदा ग्राहकों को दिया है। यही वजह है कि नई और सस्ती दरें अब तेजी से आपके पास की किराना दुकानों तक पहुंच रही हैं।

रिफाइंड और सरसों तेल के दाम गिरे: कितनी हुई बचत?

शहरों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला रिफाइंड तेल अब पहले से काफी सस्ता हो गया है। कई जगहों पर इसके दाम ₹10 से ₹18 प्रति लीटर तक कम हुए हैं। वहीं, उत्तर भारत की पसंद यानी सरसों तेल की बात करें तो इसमें भी ₹6 से ₹12 प्रति लीटर तक की गिरावट देखी गई है। यह बचत सुनने में भले ही छोटी लगे, लेकिन महीने भर के राशन में यह एक बड़ा अंतर पैदा करती है।

1 लीटर तेल की नई अनुमानित कीमतें (New Rates)

बाजार में अलग-अलग ब्रांड्स और शहरों के हिसाब से कीमतें थोड़ी बदल सकती हैं, लेकिन एक औसत अंदाजा कुछ इस तरह है:

  • सोयाबीन तेल: ₹110 से ₹125 प्रति लीटर
  • सूरजमुखी तेल: ₹115 से ₹135 प्रति लीटर
  • सरसों तेल: ₹130 से ₹150 प्रति लीटर
  • राइस ब्रान तेल: ₹120 से ₹135 प्रति लीटर
  • पाम ऑयल: ₹95 से ₹110 प्रति लीटर

आम आदमी और छोटे दुकानदारों को मिली राहत

तेल सस्ता होने का फायदा सिर्फ घर की रसोई तक ही सीमित नहीं है। छोटे हलवाई, समोसे-कचौड़ी बेचने वाले और स्ट्रीट फूड वेंडर्स के लिए भी यह ‘गोल्डन खबर’ है। जब कच्चा माल सस्ता मिलता है, तो उनका मुनाफा बढ़ता है और ग्राहकों को भी सही दाम पर खाना मिल पाता है। एक सामान्य परिवार जो महीने में 5 लीटर तेल खर्च करता है, उसकी महीने भर में ₹70 से ₹100 तक की सीधी बचत हो रही है।

क्या आगे और कम होंगे भाव?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन इसी तरह मजबूत बनी रही, तो आने वाले समय में कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम है। फिलहाल सरकार की नीतियां और बाजार की स्थिति आम जनता के पक्ष में नजर आ रही है।

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