न्यूज पेपर में लिपटा खाने से हो सकता कैंसर, एक्सपर्ट्स ने बताये इसके खतरनाक राज

आज के भागदौड़ भरे जीवन में सड़क किनारे स्टॉल पर अखबार में लिपटे हुए समोसे, पकोड़े या कचौड़ी खाना एक आम बात है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह छोटी सी लापरवाही आपकी जान की दुश्मन बन सकती है?

हाल ही में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है कि अखबार के कागज पर रखा भोजन शरीर में ‘धीमे जहर’ की तरह काम करता है। यह न केवल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का कारण बन सकता है, बल्कि आपके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को भी धीरे-धीरे खोखला कर देता है। आइए जानते हैं इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण और स्वास्थ्य जोखिम।

Why Newspaper Ink is Dangerous: स्याही और सेहत का खतरनाक कनेक्शन

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, अखबारों की छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही (Ink) बेहद हानिकारक रसायनों से बनी होती है। जब गर्म खाना, खासकर तेल में तली हुई चीजें अखबार के संपर्क में आती हैं, तो गर्मी के कारण स्याही पिघलकर भोजन में मिल जाती है। रिपोर्ट्स दिखाती हैं कि इस स्याही में मौजूद ‘ग्रेफाइट’ और अन्य सॉल्वेंट्स हमारे शरीर के सेल्स (Cells) और डीएनए (DNA) को सीधा नुकसान पहुँचाते हैं।

गर्म तेल और रसायनों का यह मेल शरीर के भीतर जाकर मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देता है और खून में टॉक्सिन्स की मात्रा बढ़ा देता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह प्रक्रिया इतनी सूक्ष्म होती है कि आपको तुरंत कोई बदलाव महसूस नहीं होता, लेकिन लंबे समय में यह शरीर के भीतर गंभीर बीमारियां पैदा कर देती है।

FSSAI Warning: सरकारी संस्था ने भी माना इसे जहर

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अपनी रिसर्च के बाद अखबार में खाना पैक करने या रखने पर सख्त चेतावनी जारी की है। FSSAI की आधिकारिक एडवाइजरी के अनुसार, समाचार पत्र की स्याही में लेड (Lead), कैडमियम (Cadmium), मिनरल ऑयल और एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन जैसे जहरीले तत्व पाए जाते हैं।

जब गर्म और तैलीय भोजन इनके संपर्क में आता है, तो एक रासायनिक प्रतिक्रिया होती है जिससे नए हानिकारक बैक्टीरिया और बायोकेमिकल्स उत्पन्न होते हैं। यह स्थिति शरीर में ‘कार्सिनोजेनिक’ प्रभाव पैदा करती है, जो सीधे तौर पर कैंसर कोशिकाओं को जन्म देने के लिए जिम्मेदार है।

More Than Just Cancer: किडनी और लिवर पर सीधा हमला

अखबार में खाना खाने के नुकसान केवल कैंसर तक ही सीमित नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके रसायनों के सेवन से शरीर में निम्नलिखित गंभीर समस्याएं हो सकती हैं:

  • ऑर्गन डैमेज: स्याही में मौजूद लेड और कैडमियम सीधे किडनी और लिवर की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं, जिससे ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।
  • पेट के रोग: इसके कारण पेट के अल्सर, पाचन की समस्या और पेट का कैंसर (Gastric Cancer) होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
  • श्वसन समस्याएं: अखबारों पर जमी धूल और फंगल बैक्टीरिया अस्थमा और फेफड़ों के संक्रमण जैसी सांस की बीमारियों को न्योता देते हैं।
  • ल्यूकेमिया (Leukemia): खून में रसायनों के मिलने से रक्त कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।

Expert Advice: इस जानलेवा खतरे से कैसे बचें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से बचने का एकमात्र तरीका जागरूकता और अपनी आदतों में बदलाव है। यदि आप सड़क किनारे खाना खाते हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि दुकानदार अखबार के बजाय सादे कागज या ‘फूड ग्रेड’ टिश्यू पेपर का उपयोग करे। घर पर भी कभी भी गर्म रोटियां या परांठे अखबार में न लपेटें। इसकी जगह आप बटर पेपर या स्टील के टिफिन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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