Labour Minimum Wages Hike: देश के करोड़ों दिहाड़ी मजदूरों और कामगारों के लिए साल का सबसे बड़ा ‘धमाका’ हो गया है। हाई कोर्ट के एक कड़क फैसले के बाद अब न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wages) में तगड़ा इजाफा होने जा रहा है। बढ़ती महंगाई के इस दौर में, जहाँ आटा-दाल से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक सब महंगा हो गया है, वहां मजदूरी बढ़ना किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।
अब मजदूरों को अपने हक के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पसीना बहाने वाले हर हाथ को उसका सही दाम मिलना ही चाहिए। चलिए जानते हैं कि इस फैसले से आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा और किन-किन लोगों की ‘चांदी’ होने वाली है।
हाई कोर्ट की फटकार: “पुराने रेट पर काम कराना अब जुर्म”
अदालत ने सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में कहा कि आज की महंगाई के दौर में पुरानी मजदूरी दरें ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि मजदूरों को कम पैसे देना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। राज्य सरकारों और श्रम विभागों को अल्टीमेटम दिया गया है कि वे तुरंत नई दरें लागू करें। अब अगर कोई मालिक या ठेकेदार पुराने रेट पर मजदूरी देता है, तो उस पर तगड़ा कानूनी डंडा चलेगा।
किन-किन मजदूरों की बढ़ेगी सैलरी?
इस फैसले का फायदा सिर्फ फैक्ट्री वालों को ही नहीं, बल्कि हर उस इंसान को मिलेगा जो मेहनत-मजदूरी करता है:
- अकुशल मजदूर (Unskilled): सामान ढोने वाले, खुदाई करने वाले और हेल्पर।
- अर्धकुशल (Semi-skilled): जिन्हें थोड़ा अनुभव है।
- कुशल मजदूर (Skilled): राजमिस्त्री, बिजली मिस्त्री, प्लंबर और पेंटर। इसके अलावा घरों में काम करने वाली बाई, सिक्योरिटी गार्ड, सफाई कर्मचारी और खेतों में काम करने वाले मजदूरों की भी मौज होने वाली है।
जेब में आएंगे कितने एक्स्ट्रा पैसे?
रिपोर्ट्स की मानें तो इस फैसले के बाद मजदूरों की मासिक आय में ₹800 से लेकर ₹3000 तक की बढ़ोतरी हो सकती है। जो लोग रोज की दिहाड़ी पर काम करते हैं, उनके रेट में भी ₹30 से ₹90 प्रति दिन का इजाफा देखा जा रहा है।
हो सकता है कि किसी को यह रकम छोटी लगे, लेकिन एक दिहाड़ी मजदूर के लिए ₹900 महीना बढ़ने का मतलब है—बच्चों के लिए दूध का इंतजाम, नई किताबें या फिर मुसीबत के समय दवाई का खर्चा। अब उधार मांगकर घर चलाने की नौबत कम आएगी।
दिसंबर से ही लागू हुआ नया नियम: अब देरी नहीं!
अक्सर सरकारी आदेश फाइलों में दबे रहते हैं, लेकिन इस बार हाई कोर्ट ने साफ कह दिया है कि “नो टालमटोल”। यही कारण है कि दिसंबर 2025 से ही कई राज्यों में बढ़ी हुई मजदूरी मिलनी शुरू हो गई है। मालिकों को सख्त निर्देश हैं कि वे नया पेमेंट बढ़ाकर ही करें। अगर कोई मालिक आनाकानी करे, तो मजदूर भाई तुरंत लेबर डिपार्टमेंट में शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
मजदूर खुश तो देश खुश!
जब मजदूर के पास पैसा होगा, तो वह बाजार से सामान खरीदेगा, जिससे देश की इकोनॉमी भी भागेगी। उचित मजदूरी मिलने से मजदूरों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे ज्यादा लगन से काम करेंगे। यह फैसला सिर्फ पैसों की बात नहीं है, बल्कि समाज में मजदूरों को सम्मान दिलाने की एक बड़ी पहल है।